Friday 27 July 2007

मेरे आँखों को संभाल के रखना


दरअसल ये कहानी मैंने अग्रसारित किये गए एक ई चिठ्ठी से उठाई है। इसलिये आप लोगों ने शायद पहले भी पढी होगी। मुझे अच्छी लगी.... मैं इसे आप लोगों के सामने रख रहा हूँ ।

रंजना एक अंधी लड़की है, वह अंधी है इसलिये अपने आप से बहुत नफरत करती है। नवनीत उससे बहुत प्यार करता है। नवनीत को छोड़ कर वो सब से नफरत करती है। एक दिन रंजना नवनीत से कहती है - यदि मैं दुनिया देख सकती तो कितना अच्छा होता, मैं तुमसे शादी कर सकती थी।

एक दिन किसी ने उसको अपनी आंख दान दिया। अब वो सब कुछ देख सकती थी। नवनीत ने उसे पूछा अब तो तुम सब कुछ देख सकती हो, क्या तुम मुझसे शादी करोगी। रंजना ने नवनीत कि तरफ देखा तो अचंभित रह गयी वो भी अँधा था। रंजना ने नवनीत को इनकार कर दिया।

नवनीत कि आँखों मे आंसू थे और वो उससे दूर जा रहा था और यही दुआ कर रह था- "मेरी प्यारी रंजना मेरे आँखों को संभाल के रखना "

2 comments:

Udan Tashtari said...

मार्मिक एवं हृदय स्पर्शी.

उमाशंकर सिंह said...

कहानी बेशक पहले की है लेकिन ये आज भी घटित होता है। पुराने पाठों को यूं ही याद दिलाते रहिए विनोद बाबू