Friday 14 December 2007

दिल दर्द और बाज़ार

समय समय पर कुछ शेरों शायरी करता रहता हूँ। उन्हीं को आप के सामने पेश कर रहा हूँ। आपकी टिपण्णी का स्वागत है।



वक़्त कि बात समझ ना सका मिलने के बाद भी आप से
ए खुदा पूजा करूं तेरी या नफ़रत अपने आप से।



दिल मे हो दर्द तो हर बात बुरी लगती है
रकीब हो सच्चा तो फासले भी छोटे लगते हैं।



नानी की कहानी और किस्सों मे परियों को सुना था
आज मुलाक़ात हुई तो बस देखता ही रह गया।



बिछड़ भी गया आप से तो गम ना होगा मुझको
तेरी तस्वीर की इबादत से कौन रोकेगा मुझको ।



फूलों को क्या खबर उनके चाहने वालों की
ख्वाहिश ऐसी कि दफ़न भी हो तो उनकी सेज पर।




दिल के कद्रदान रहे कहॉ
मंडियों मे भाव उंचे हो चले हैं।




दर्द खामोश मुस्कराहट से बयाँ नही होता
उसे जुबान पे पिरोना भी होता है।

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