Tuesday 22 May 2007

कभी कभी


कभी कभी मेरा मन भी ना जाने क्यों ऐसे गानों के पिछे भागता है जो मुझे पसंद है ।
मै जनता हूँ आप में से कुछ लोग ऐसे भी होंगे जिन्हे ये पसन्द ना आये । मगर यूं ही कभी कभी मेरा दिल में ख्याल आता है कि मैं आपको तंग करता रहूँ ।

कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है ,
कि जिंदगी तेरी जुल्फों के नम्र छांव मे गुजरने पाती
तो शायद आप हो भी सकती थीं ।

रंजो गम कि स्याही जो दिल पे छाई है
तेरी नजर कि सुवाओं मे खो भी सकती थी ।
मगर ये हो न सका
मगर ये हो ना सका , और अब ये आलम है
कि तू नही तेरा गम तेरी जुस्तजू में भी नही ।
गुजर रही है कुछ इस तरह से जिंदगी जैसे
इसे किसी के सहारे कि आरजू भी नही ।

न कोई राह, न कोई मंजिल, न कोई रौशनी का सुराग
भटक रही है अँधेरे मे जिंदगी मेरी ,
इन्ही अंधेरों मे रह जाऊंगा कभी खो कर ।
मै जनता हूँ मेरी हम्न्फ्फस
मगर यूं ही कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है .......

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