Saturday 19 May 2007

अरमान


गहरी आंखों मे दर्द ना बटोरो,
काले बादलों को बरसने तो दो ।

धड़कते अरमानों को बंदिशें न दो,
सुनहरे बालोँ को बिखरने तो दो ।

उबलते जज्बातों को उम्र न दो,
जख्मों को अब पिघल जाने तो दो

चंचल नज़रों पे वक़्त के पहरे ना दो,
पलकों को फिर शर्माने तो दो ।

चेहरे पे चेहरा आने न दो,
गलों पे लाली छाने तो दो ।

तड़पते दिल को यूं जंजीरे ना दो,
चाहतों को यूं हवाओं मे उड़ने तो दो

लंबी जिंदगी को तनहाई न दो,
कानों मे शोर होने तो दों ।

No comments: